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मराठी की इस बेहतरीन मूवी को हिंदी में देखने का अवसर मिला । मोहन अगाशे जी का मंझा हुआ अभिनय चरित्र को सजीव करता है।
चिंता से मुक्त अलमस्त हाथी का प्रयोग कहानी में बहुत प्रभावी है।
एक आयु के बाद बुजुर्ग और बच्चे में कोई अंतर नही रह जाता है।