यह भारतीय सिनेमा की एक ऐसी फिल्म है जो फ़िल्म नही एक महाकाव्य है ।बहुत बड़े कैनवास पर चित्रित यह गाथा भारतीय किसान की सरलता और जिजीविषा का बहुत मार्मिक निरूपण करती है ।महबूब खान की सिनेमाई बुद्धिमत्ता इस फ़िल्म में पूर्णता को प्राप्त कर रही है ।नरगिस जी ने अविस्मरणीय अभिनय किया है ।फ़िल्म सभी आयामो पर उत्कृष्ट है ।बाल कलाकार साजिद के अभिनय को छूने वाला आज तक उस उम्र का कोई कलाकार नही हुआ ।सुक्खिलाला का कमीना पन बहुत कुछ सोचने पर विवश करता है।सुनील दत्त,राजेन्द्र कुमार और राजकुमार बहुत दमदार अभिनय किये है ।