दोस्तो मैंने 15 अगस्त को एक नाटक देखा और उसे अनुभव दिया। नाटक का नाम "घासीराम कोतवाल"। ये नाटक भारतवर्ष के नामचीन और वलिष्ट नाट्यकार श्री विजय तेंदुलकर जी द्वारा लिखित है। सालों पुराने होने के बावजूद भी ये नाटक हमेशा की तरह आज भी प्रस्तुति एवं लोकप्रिय है।
15 अगस्त को मैंने जो नाटक देखा वह मूल नाटक का हिंदी अनुवाद है एवं स्थान कल पत्र अनुकूल एक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। निर्देशक श्री अभिजीत पानसे इस समय के चर्चा हेतु अप्रवासी समस्या को संवेदना के साथ इस नाटक में दर्शन देते हैं।
नाना साहेब के चरित्र में श्री संजय मिश्रा जी और घासीराम कोतवाल के चरित्र में श्री संतोष जुवेकर जी के इलावा बनारस से आए हुए एक सहकर्मी पंडित की भूमिका निभाते हुए अभिनय आपका विशेष रूप से दृष्टि आकर्षण करेंगे।
एक गंभीर विषय के नाटक में श्री संजय मिश्रा एक राहत की सास की तरह आते हैं। अपने एडबुट जदुई फैनकारी बाल पे वे आपके पल हंसेंगे तो पल भर में घृणित भाओ से भर देंगे। मनिया जैसे आप उनके हाथ की कठपुतली है। मैं चाहती हूं कि अगर आप मुंबई शहर में हैं तो आप भी अनुभूति को महसूस करें।
इसलिए कोई फोटो नहीं, कोई वीडियो नहीं....मेरी विनती है आप 23 अगस्त को एनसीपीए जाके ये नाटक देखें। टिकट बुकमायशो में अपलोड है!
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