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यह कृति एक अनमोल साहित्यिक धरोहर है। ग्राम्य जीवन और उसकी विषमताओं को पूरी सहजता और गरिमा के साथ उकेरने में रेनु साहब सर्वथा सफल रहे हैं। भाषा में आंचलिक शब्दों के सरस मिश्रण ने गजब का प्रभाव उत्पन्न किया है।