मीडिया की हकीकत बयां करती फिल्म... कैसे मीडिया तिल का ताड़ बनाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ सिर्फ और सिर्फ अपनी TRP बढाने के लिये करता है... बाद में यदि वही व्यक्ति निरअपराध साबित होता है तो फिर कोई भी मीडिया वाला उसकी खबर तक नही लेता...!! मीडिया के इस दोगलेपन पर अंकुश लगना जरूरी है... वैसे धीरे-धीरे लोग मीडिया की सच्चाई से बाकिफ़ हो रहे है... अब मीडिया की विश्वसनीयता समापन की ओर ही है... सोशल माध्यमों के आ जाने के बाद अब इसके मनमाने पन का अंत वैसे भी शुरू हो गया है... जनता अब सब जाननें लगी है है...!!
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