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Suresh Rathi
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रुपये पेड़ पर नहीं लगते हैं पहले 3 घंटे की फ़िल्म होती थी तब टिकिट कम लगती थी अब साले रुपये बढ़ा दिए और टाइम कम कर दिया फिर लोग सिनेमा तक नहीं जाएंगे Tv पर ही देखेंगे
Ittefaq
Review
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9y
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