मैं क्या लिखूं या मैं कैसे लिखूं, लेकिन अगर मैने लिखा नहीं तो मेरे अंदर की चित्रा की बेइज्जती है,
Salute Divya sir !
ओर मैने पूरी किताब दो दिन में पढ़ ही लिया था कि 98 page no. Gorakhpur का ज़िक्र आया और मुझे शक हो गया था तो मैने उस पेज की हर लाइन पढ़ने की लिए घंटे घंटे भर समय लगाया जिसमें मेरे अंदर की धारा मेरी आंखों में जम गई !
वाकई क्या लिखे है ।