प्रेमचंद जैसे युगनामधारी साहित्यकार की यह रचना भारतीय किसान की गाथा है। होरी महाजनों के कर्ज में डूबकर किसान से मजदूर बन जाता है।आज का किसान भी कर्ज से उबर नहीं सका है। गोदान को पड़ने से यह लगता है कि काश होरी धनिया की बातें भी मान लिया करता तो उसकी इस्थिती ऐसी नहीं होती। महिलाएं भी अपना घर बचाने की भावना से सोचती हैं।आज की महिला घर और बाहर दोनों जगहों पर कार्य करके यह साबित कर रहीं हैं।