जिसके मोबाइल में हिंदी फोंट ना खुले तो मैं उसका क्या ही कर सकता हूँ, पर मैं हिन्दी में ही लिखूँगा-
बेहतरीन, पहले तो कास्ट समझ नहीं आए पर दूसरे तीसरे भाग में पहुँचते पहुँचते वो आँखों को भाने लगे... कास्टिंग करते वक़्त नेपोटीस्म जैसे शब्दों को तिलांजलि दी गई, उम्दा। नसीरुद्दीन साहब और अतुल कुलकरणी आप हमेशा की तरह कमाल हो...और तैलंग साहब आप पापा लूक में selection day हो या मिर्ज़ापुर ज़िम्मेदारी से निभा रहे हो.. ग़ज़ब। शीबा जी तो जैसे राजमाता लग रही थी पूर्णतः राजस्थानी अदब। कुणाल कपूर तुम शुद्ध मुंबाइया एक्ट करने में माहिर लगे। और लास्ट भाई रित्विक और श्रेया ख़ूब अच्छा काम किया और अच्छा करो।।।
बाक़ी इन सबसे ऊपर शंकर-एहसान-लोय आप की तिकड़ी सलामत रहे
#ख़ानाबदोश