उपन्यास 'इदन्नमम' में लगातार बनी तीन पीढ़ियाँ समय -अंतराल से नारी जाति के मनोविज्ञान में आये परिवर्तन क रेखांकित करती हैं । बऊ का मनोविज्ञान गांव -घर की
चौहद्दी में बंधा अपने को नियति के अधीन मानता है ,प्रेम क्षणिक सुख की आशा में घायल करनेवाली पगडंडियों से गुजरती हुई पुरुष वर्ग के चेहरों को पहचान पाती हैं,पर उनके खिलाफ जाने का साहस अख्तियार नहीं कर पाती है, तीसरी पीढ़ी मंदा और सुगना का है ।मंदा के कदम तो अपने सबसे करीबी पदचाप की भी अनदेखी कर यात्रा परहैं,इस अर्थ में उपन्यास का नामकरण सार्थक है ।