आदरणीय सर जी,
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आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
दीपोत्सव आपके जीवन को सुख, सम्रद्धि, शान्ति, सौहार्द भरे एवं अपार खुशियां की रोशनी से जगमगाए ,।
संलग्न: दीपों पर्व पर
" स्वरचित कविता " सम्मान प्रेषित हैं।
सादर:
सुनीता -शिव राम मीमरोठ,
Dy.CEE(C) JP NWR
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,दीपावली: कौनसी/ किसकी और क्यों ?
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दीपावली ! आज फिर आई है, एक दम नई सी लगती हैं,
नई तो नही , ये तो वो ही पुरानी दीपावली की पुनरावृति हैं।
दीपावली ! आज मां लक्ष्मी पूजन का पावन पर्व भारत मे हैं,
दीपक-फटाखों की कीमत में 50 % पर चीन का हिस्सा हैं।
दीपावली ! आनन्द,उत्साह , जोश से ज्यादा दिखावा हैं,
खुशी का पर्व अब मात्र प्रदूषण व व्यापार का पर्व बन गया है
दीपावली ! खुशियों का पर्व हैं या या शॉपिंग का टशन हैं,
मैंने देखा! गरीब दुकान के बहार ग्राहकों से आटा मांग रहे है।
दीपावली! किसकी दीपावली, गरीबी की या अमीरों की हैं
गरीब गाय आज भी अमीरों शेरों के शोषण की शिकार हैं।
दीपावली किसकी ! इंसानों की या पशु या रिवाजो की हैं,
इंसान यहाँ पशुओं बदतर हैं, पशुओं यहां को पूजा जाता हैं।
दीपावली! कोनसी ,असमानता का अन्धकार मौहल्ले मे हैं,
झूठी मुस्कान फुलझड़ीसी होठों पर, मन नफरत कालिख़ हैं।
दीपावली क्यों ? सीता-राम के अयोध्या आगमन का पर्व हैं,
गर्भवती सीताजी को अयोध्या से भगा दिया फिर भी गर्व हैं।
सादर: शिव राम मीमरोठ
Dy.CEE Const JP