मित्र ,शीक्षण के टुकडे कर के ,उनको हर प्रवाह से अलग करके पढाई करवाया जाता है ,तो समग्र शीक्षण क्यों नहीं,
दुसरा आज जो पढाई हम कर रहे है ,मेरे खूद के अनुभव से नब्बे प्रतिशत उपयोग में नहीं आता ,तो ये नीरुपयोगी शीक्षण के लीये जीवन के बीस साल और बेहिसाब रकम क्यों खराब करे !