फूल और पौधों को सींचा जाता है पर उनको बोनसाई नहीं बनना चाहिए। ऐसे ही बच्चो को पढ़ाई कराओ और वो जैसे है वैसे ही सुंदर है। कभी कभी माता पिता की अपने बचपन के कुछ इतने स्ट्रॉन्ग इंप्रेशन होते है जो वो carry नहीं कर पाते और उनका solution अपने बच्चो में ढूंढते है। और जब नहीं मिलता तो वो उसको पाने के लिए किसी हद्द तक भी का सकते है। पर जब इस जाल से निकालना पड़ता है तो फिर वो अपने आपको ही संभालने में असमर्थ हो जाते है।
बहुत ही वाजांदार एक्टिंग है सारे किरदारों की और बच्चे तो कमाल ही है और होते है।