जब मैं कक्षा 9 में पढ़ता था तो इस पाठ को जब मेरे गुरुजी पढ़ा रहे थे तो आँखों मे आंशू थे ,ओर इस पाठ ने मेरे मन मे पशु प्रेम जाग्रत किया
बर्मा जी ने इस गद्य में गिल्लू का जिस प्रकार चित्रण किया है वो शब्दो मे बयान नही कर पाऊंगा
बस भावनाओ में बसा हुआ है
बहुत ही भावनात्मक कथा है ये।