भगवान श्री कृष्ण पे अधारित ये नाटक अतयंत ही कपोल कल्पित घटनाओ को अपने मनमाने ढंग से रूपांतरित कर हिन्दू धर्म को बदनाम करने के उद्देस्य से दिखाया जा रहा है ।
इसमे भक्त सुदामा का जिवन चित्रण जिस प्रकार किया गया है वो अत्यंत खेदजनक है ,सुदामा प्रकरण के द्वारा पुरे ब्राह्मण समाज या हिन्दू समाज को अत्याचारी के रूप मे दर्शाया गया है ।
समय आ गया है की ऐसी कोई वयवस्था होनी चाहिये की इस प्रकार के नाटक या फिल्म आदी पहले धर्म संसद से प्रमाणीत करके ही दिखाये जायें ।