अति उत्तम। बहुत ही सही विश्लेषण किया गया है। आज के समय में मुंशी प्रेमचंदजी भी उतने ही महत्वपूर्ण है जितने की सौ वर्षों पूर्व। मुंशी प्रेमचंद जी को आधुनिक युग का भारतीय शेक्सपियर कहा जाए तो अतिशोक्ति नहीं होगी। प्रस्तुत कर्ता भी प्रशंसा के पात्र है जिसप्रकार आपने दो बैलौ की कहानी को कहानी ही नहीं देश की स्थिति की खुली किताब प्रस्तुत कर सपना तोड़ा है। आपको इसका क्रेडिट तो जायेगा। जबकि मुख्य कार्य तो मुंशी जी का ही था परन्तु समय समय पर जिस प्रकार पौधों को जल देने की आवश्यकता होती है उसी प्रकार आपने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।