जहाँ समाज सच्चाई से आँखे फेर कर झूठे विश्वास की नींद सो जाता है वहाँ उसे थप्पड़ मार के जगाना पड़ता है..! ये फ़िल्म ऐसे ही सोए हुए और सेक्युलर समाज की दुहाई देने वाले लिब्रान्डु गैंग के गाल पर लगा हुआ जोरदार थप्पड़ है | अगर इस थप्पड़ की गूँज से भी समाज और हमारा देश नही जागा तो ना जाने कितने ही विभिन्न धर्म और उन धर्मो का पालन करने वाले आनेको लोगों को एक दिन आपने ना जागने की बड़ी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी |