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Jai shree ram
एक राष्ट्र एक धर्म-- अहिंसा परमो धर्म
दया ,दान ,भक्ति
Tandav
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आदेश आदेश
""नाथ संप्रदाय""
जब सभी धर्म शमशान तक खत्म हो जाते हैं वही से शुरू होती है नाथ संप्रदाय ।।
नाथजी के समक्ष मरे हुए मुर्दे भी खडे होकर दंडात्मक प्रणाम कर आदेश करते हैं
नाथ संप्रदाय एक ऐसी संप्रदाय जैसे दुध का माखन वैसे ही सभी संप्रदायों का मथन करे के जो निचोड आता है अंतिम चरम जिसे कहते हैं वह है नाथ संप्रदाय ।।
परशुराम जी ने इस पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से विहीन कर दिया था और वर्ण में ब्रह्माण है उन्होंने नाथ संप्रदाय की शिष्यता धारण कर जो संहार उन्होंने किया था उससे मुक्ति के लिए नाथ संप्रदाय में शामिल हुए क्योंकि यह संप्रदाय सिद्ध संप्रदाय है !
हमारी संप्रदाय का मुख्य कारण यह है कि इसमें शामिल होने वाले मनुष्य को यम नियम अनुसासन पालन करने में कोई कमी नहीं रखते हैं !
यह जिसने शिष्यता धारण की है उसे जगत से विरक्त होना पडता है
पाप और पुण्य से न्यारा होना पडता है कोई मंदिर मस्जिद तीर्थ की अवशकता नहीं होती है
हमारे सिद्धो ने देही को सर्वोच्च माना है न हमारी इस देहि में ही संपूर्ण ब्रह्मांड बसा है और इस देहि का मथन सर्वप्रथम नाथ संप्रदाय ने किया है
इस मथन रूप है गर्भ गायत्री जिसमें संपुर्ण शरीर का विवरण दिया है !
गोरख वाणी जिसमें अमरता का रहस्य छिपा है
पर इसे जानेगा जाननहारा
मुरख पचे बजारा
हमारी संप्रदाय में शब्दों की चोट दि जाती है
कोई रहम नहीं जो पंरपरा है वह आनादि काल से चली आ रही है धन माया और नारी का मोह नहीं रखती है !
ऐसी अनुपम और निर्मली है "नाथ संप्रदाय !!*
⛳⛳ॐ नम:शिवाय⛳⛳*
*🍃ॐ शिव गोरक्ष जय शिव गोरक्ष🍃*
*📯श्रीनाथ जी गुरूजी को आदेश आदेश📯*
R. N. Yogi