निशब्द कर देती हैं हमारे इस समाज को जिसे उसी तरह से जीना आता है जिस तरह से चला आ रहा है वह एक ऐसे समाज में जीने का आदी है जिसका अपना एक अनुशासन है वहां कुछ भी प्राकृतिक होने के लिए जगह नहीं है वहां जो होता है उसकी रूपरेखा समाज पहले लिख देता है..यह फिल्म ऐसे समाज को निशब्द कर देता है क्योकि यह वो दिखाती है जो सकता है हो जाता है संबंधों में वो जो जुड़ा होता है मन के भीतर बसे जहां में जहां व्यक्ति का मन अपनी दुनिया अलग से बनाता है...