Afsr मूवी मैं समझता हूँ कि फ़्लॉप इसलिए है कि इसमें जो थीम है वह क़तई पूरा नहीं होता है
कोमेडी से कुछ राहत तो मिलती है लेकिन लेखक के पास पटवारी व कन्नूनगो के बारे लिखने को कोई idea नहीं है ।लेखक ने बेकार कथा लिखी है
...कम से कम पटवारी और कानूनगो का काम, उनकी कार्यप्रणाली को दिखाना चाहिए था
मुझे लगता
कि इससे घटिया लेखन और idea नहीं हो सकता है
भविष्य में फ़िल्म बनाते समय कहानी का ध्यान रखा जाना चाहिए
यह फ़िल्म 10 में से 2 नम्बर ही ले पायी वोह भी कोमेडी के लिए