स्वातंत्र्य वीर सावरकर , एक अतुल्य एकमेव स्वातंत्र्य वीर सेनानी जिन्हे दो उम्रकैद की सजा, कालापानी अंग्रेजो द्वारा दी गई।रनदीप हुडा उनके समुद्र से गहरे और विशाल चरित्र को तीन घंटे के सिनेमा मे समेटने मे पूरी तरह सफल हुए हैं। उन्होने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के अनछुए पन्नो को उजागर करने की जो हिम्मत दिखाई है उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।
समस्त पात्रों का अभिनय जीवंत एवं श्रेष्ठ रहा है। रनदीप हुडा और और अंकिता लोखंडे ने वीर सावरकर और यमुनाबाई के पात्रों को साकार करते हुए पर्दे पर जीवंत कर दिया है।
जिस भी व्यक्ती को स्वतंत्र भारत का नागरिक होने पर गर्व है उन्हे यह पिक्चर अवश्य देखनी चाहिए ताकि उन्हे यह मालूम पडे कि हमे हमारी स्वतन्त्रता असंख्य परिवारों के बलिदान और त्याग के कारण प्राप्त हुई है।