ग़दर-2 फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिहाज से बनाई गई है उस फिल्म में देशभक्ति की वो भावना नहीं आ पाती जो की असल में आनी चाहिए । इस फिल्म में वो इमोशन नहीं दिखा पाए जो की 22 साल पहले की ग़दर में दिखाए गए थे। फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है की पुरानी ग़दर की फीलिंग आये पर इसमें वो पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। ख़ास तौर पर पाकिस्तानी जनरल का रोल निभाने वाले बन्दे ने सिर्फ चिल्ला चिल्ला कर अपने रोल को हिट करने की कोशिश की है पर वो भी इसमें कामयाब नहीं हो पाए।
हमारे सन्नी भाजी सिर्फ फिल्म में पहले 20 मिनट में दिखाई देते हैं और आखिर के 30 मिनट में आते हैं और इन्ही के दम पर सिनेमाघरो में भीड़ जुट रही है। फिल्म का हैंडपंप वाला सीन दर्शकों को भरपूर हंसाता और मजे देता है।
अमीषा पटेल तो सिर्फ इस फिल्म में रोने के लिए आई है और कोई काम नहीं है उनका पर उनका होना भी जरुरी था ग़दर 2 के लिए।
फिल्म में जीते का किरदार निभाने वाले उत्कर्ष शर्मा और उनकी हीरोइन ने भी कुछ ख़ास असर नहीं किया है हाँ ये जरूर है की ये फिल्म उनके आगे के भविष्य के लिए थोड़ा मदद जरूर करेगी।
अंत में सिर्फ यही कहना ठीक है की ग़दर-2 भारत के 76 वे आजादी दिवस के अवसर पर देशवासियों की थोड़ा मनोरंजन के साथ साथ देशभक्ति जरूर सिखाएगी। इसी बात का फायदा Director - अनिल शर्मा ने उठाने की पूरी कोशिश की है।
जय भारत , जय हिंदुस्तान , जय हिन्द।।।।।।।।