कुछ लोग कह रहे हैं कि, पुरानी फिल्म में करिश्मा कपूर का कैरेक्टर कमजोर था, उसका अपना कोई स्टैंड नहीं था या वो "मेरा पति-मेरा देवता" टाईप काम किया था। मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहता हूं कि, इसमें बुराई क्या है? वे लोग 2-5% शहर में रहने वाले "indians" का कल्चर पता है, मगर वे 95-97% भारतीयों का कल्चर नहीं जानते। एक हिंदुस्तानी औरत के लिए उसका पति हर हाल में देवता होता है, बशर्ते वो बिलकुल कमीना ना हो। गोविंदा का पात्र अपनी पत्नी से प्रेम करता है, उसकी दौलत से नहीं। वो कहता है कि, "मेरी बीवी है, उसे भीख माँगकर भी खिलाउँगा"। एक हिंदुस्तानी औरत के लिए इतना काफी है। वो हर छोटी बात में नुक्स निकालकर " Man bashing" नहीं करती, इसिलिए वहाँ आज भी रिश्ते टिकते हैं।