मुझे डायरेक्टर की फोटोग्राफी अच्छी लगी.
बहोत कायदे के साथ चलती है, वो गोलबारुद वाले सीन.. जी जान से निभाये है अक्टिंग भी..
...
अब लॉजिक वाली बात तो.. सोचनी नहीं है,
कूछ पार्ट ओके ...कूच चलता है...
..
कूच्छ... क्या गांजा चरस अफिम..lsd लगाके लिखते hai क्या.एसा भी लगता है.
Loud होना ठीक लेकीन किताना?
लॉजिक bypass ठीक लिकिन किस हद तक?
डायरेक्ट गाली नाहि दे सकते मतलब कुच्च भी.
फिर ठीक है