यह बेहद संतुष्टि भरा है कि भारत में महिलाएं इतनी शानदार लिखती थीं लेकिन आज सोशल मीडिया के जमाने में ये कहीं खोता जा रहा है। शायद आज की ज़्यादातर लड़कियाँ और लड़के समझ भी ना पाएं लिखना तो बहुत दूर की बात है। रही सही कसर अंग्रेजी ने पूरी कर दी कि भारत के युवाओं को एक बहाना मिल गया है कि यार हिंदी समझ नहीं आ रही तो जरूर पढ़ता। जिस देश में मनु भंडारी, महादेवी वर्मा जैसी महिलाओं को भूल कर लोग फिल्मी अभिनेत्रियों को याद रखेंगे उस देश को गर्त में जाने से कोई नही रोक सकता है। बात कड़वी है पर सच है।