कहानी सम्राट मुंशी जी ने गुलामी के दिनों मे समाज मे व्याप्त आर्थिक असन्तुलन पर एक रेखाचित्र प्रस्तुत किया है वही प्रसंग के केन्द्र चरित्र होरी का समस्त पक्षों से सन्तुलित,मार्मिक,सहृदय व्यवहार,निर्धनता के बावजुद अच्छी सामाजिक पृष्ठभूमी के चलते रायसाहब के विश्वासपात्र बनने का जैसे बेजोड़ समायोजनकिया है ।।।।।।सानदर ||||