योगदीपिका अत्यंत सुरुचिपूर्ण ,विज्ञान के मानको पर तथा शरीर रचना विज्ञान की कसौटी पर अत्यंत प्रामाणिक पुस्तक ।सहज ,सरल और बोधगम्य।इस पुस्तक को गंभीरता से पढ़ते हुए यौगिक क्रियाओं,आसनो और प्राणायाम को भलीभांति सीखा जा सकता है।योगदीपिका मेरे पास सन् 2005 से है।बचपन में योगासनों का अभ्यास इस पुस्तक को पढ़ने के बाद और अच्छा हुआ है।ऐसा मैं मानता हूं।65 वर्ष की उम्र में भी अच्छा अभ्यास बना हुआ है ,तो इसके लिए लाइट आन योगा /योग-दीपिका का मैं कृतज्ञ हूं।