क्यों संस्कृतियां धाराशायी होती हैं, क्यों व्यक्ति अपने आचार-विचार पर अडिग नहीं रह पाता, क्यों उसके जीवन की मजबूत आधारशिलाएं दरकने लगती हैं, उन सभी का एक मात्र उत्तर है अहंकार,, जिसके हर सही और ग़लत फैसले को न्यायोचित ठहराते हुए हम भविष्य को जीतने की कोशिश करते हैं, फिर भी ईश्वर हर बार कोई न कोई शान्ति का प्रस्ताव हमारे सामने रखते हैं ताकि ज्ञानचक्षुओं पर से अंधकार का पर्दा गिर सके।