बेशक इससे बेहतर बन सकती है रामायण बहुत पैसे खर्च करके आधुनिक वीडियो क्वालिटी और ग्राफिक्स में सुसज्जित करके खूब ताम झाम और तीर तरकस दिखाकर लेकिन वो भावनाएं कहाँ से जगाओगे ? रामानन्द सागर जी की रामायण आज 33 साल बाद भी एकदम तरोताज़ा और सजीव लगती है ये सिर्फ एक धारावाहिक नही करोड़ो भारतीयों की आस्था है । प्रत्येक घर मे जब रामायण चलता है तो हरेक को पता है आगे क्या होने वाला बावजूद इसके आंखे भर आती हैं होठ हिलने लगते हैं हम रामानन्द सागर जी के रामायण हरेक पात्र को बिल्कुल सत्य मान बैठे हैं ऐसा लगता है जैसे अरुण गोविल जी ही श्री राम हैं सुनील लहरी जी ही लक्ष्मण भैया हैं दीपिका जी सीता हैं । हे महामानव आप धन्यवाद के पात्र हैं जो आपने हमे इतना सजीव रामायण दिया जो हमारे लिए सिर्फ एक धारावाहिक नही बल्कि हमारी श्रध्दा और हमारा इतिहास है..!
....जय श्री राम ...🚩🙏