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मंटो का ज़िक्र हो और ठंडा गोश्त का नाम न आये, वो ठीक ऐसा है कि बारिश बरस रही है, और ज़मीन उसकी धारदार बूंदों से नहीं भीग रही हो.
-डॉ. जियाउर रहमान जाफरी
मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज गया, बिहार
Thanda Gosht
Review·2y
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आज के युग में इस प्रकार की नीरस कहानियों पर शायद ही कोई फ़िल्म बने.