बेताल, बर्ड्स ऑफ़ ब्लड के बाद शाहरुख़ खान की दूसरी नेटफ्लिक्स की मिनी सीरीज के तौर पर रिलीज़ की गयी. हलाकि इस लॉक डाउन के मौहौल में ऐसे सीरीज ही हैं जो इंडियन ऑडियंस को एंटरटेन करती आ रही हैं. बात करे बेताल की, तो मिनी सीरीज के तौर पे कहानी और करैक्टर थोड़े कमजोर नज़र आये. पुराने दशकों के हॉलीवुड फिल्मे जैसे हिल्स है ऑय १ -२, डौन ऑफ़ डेड और कईओं के फॉर्मूले को एक नयी बोतल में इंडियन लेबल के साथ बाजार में उतारा गया है. कहानी के कुछ पहलू इंडियन ऑडियंस के ज़हन में तो होती है पर पहली बार एंटरटेनमेंट के नाम पर ही सही, परदे पे लाया गया. बात तब हाथ से निकालती दिखती है जब, भूत, मुर्दे, ज़ोम्बी, इन्फेक्शन, काला जादू आदि का सलूशन ऑडियंस को पिलाने की कोशिश की जाती है. अब चूँकि ये इंडियन सीरीज है तो इमोशन का होना बनता है, जो आपके हॉरर सीरीज के हर उमीदों पर पानी फेर देता है. खैर सीरीज की बैकग्राउंड म्यूजिक, सिनेमेटोग्राफी, कलर स्कीम और थीम जबरदस्त है, VFX इंट्रो को छोड़ हर जगह थोड़ा कमजोर लगा. वैसे फोक लैंग्वेज के साथ थोड़ा बुरा एक्सपेरिमेंट भी किया गया है, न तो पूरा नागपुरी रह पाया और नहीं रीजनल बंगाली. कुल मिला कर बात ये है साहब की, चार एपिसोड वाली इस मिनी सीरीज से बहुत ज्याद उम्मीद नहीं कर सकते, एंटरटेनमेंट के हिसाब से देखें, अच्छी बात ये है की अब इंडियन ऑडियंस भी तुम्बाद जैसे फिल्मो का कीमत पहचानती है. तो टीम बेताल आपकी कोशिश सराहनीये है ऐसे प्रयाश जारी रखें
- एक आम ऑडियंस