कुछ कहानियाँ हमें अदंर तक झकझोर जाती हैं या यूँ कहें हमारे मस्तिष्क में एक कम्पन पैदा कर देती हैं, उस घटना का गहरा असर सीधा हमारे ज़हन पर पड़ता है और इन सबके बीच उलझता है सिर्फ हमारा मन l शायद यही वो कहानियाँ हैं जिन्हें पढ़कर हम एक नया जन्म लेते हैं और वापिस एक नई जिदंगी जीते हैं और खुदको कहानी के किरदारों से जोड़ जिदंगी जीने की एक नई समझ खुदमें पनपने देते हैं l
कहानियाँ जो किरदार को मरने नहीं देती, इन्हें जितना पढ़ा जाए और रोचक और सजीव हो जातीं हैं l
अक्टूबर जंक्शन कुछ ऐसी ही कहानी है,इसे पढ़ने के बाद मुझे ये आभास हुआ मानो जिंदगी में कुछ मिलकर भी कुछ नहीं मिलता l
एक दिन सब रेत हो जाता है बिल्कुल अक्टूबर जक्शन कहानी की तरह l
सुदीप एक बिज़नेसमैन और चित्रा एक संघर्षशील लेखिका l दो जिदंगीयों की सुई आकर एक दूसरे के धागो में उलझ कर एक दिन आज़ाद हो जाती हैं l अंत में सिर्फ दुख मिलता है और जिदंगी जितनी आसान दिखती है असल में कभी होती नहीं l