पुस्तक पढ़ी है। इसमें तुलसी और रत्ना के सम्बन्धों का जिक्र ही नहीं अपितु तुलसी के इर्द गिर्द घटित घटनाओं के साथ साथ पंडित पुरोहित वर्ग की मानसिकता का भजइक्र है। सामयिक युग में चर्चित श्रीराम मंदिर को स्थापित करने हेतु मुगल और हिंदू राजाओंका संघर्ष भी है।