फ़िल्म मे ऐसा विषय लिया गया है जो न्यायालय में विचाराधीन है और जिसका कोई आधार ही नहीं है। अगर कोर्ट से सम्बंधित कोई फ़िल्म बनानी है तो ये बनाये की कितने बेगुनाह बिना किसी दोष के कितने कितने दिनों जेल में रहते है उनको तत्काल न्याय के बदले सिर्फ तारीख पर तारीख मिलती है 😔😔
Very Bad Experience this movie.