यह फिल्म आज के दौर में बेहद जरूरी हो जाती है दरअसल यह आवश्यकता फिल्म की विषयवस्तु की गंभीरता के मद्देनजर कहा जा रहा। आज राजनीति जहाँ संकीर्ण हितों को लेकर होती दिख रही, राजनीतिक दलें गैर जरूरी या कई बार तात्कालिक मुद्दों को आधार बनाकर जनता को गुमराह कर सत्ता प्राप्त कर लेती हैं, वैसी स्थिति में यह फिल्म जो 'चुनावी साक्षरता' पर आधारित है, वर्तमान में व्यक्ति व समाज की ज़रूरत है।
आज जहाँ दक्षिण भारत के राज्यों में भाषाई राजनीति केन्द्र में दिखती है वहीं उत्तर के राज्यों में धर्म व जाति। आज जहाँ वैश्विक स्तर पर सभी देश सतत् विकास लक्ष्य जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य की वकालत करते हैं वहीं घरेलू स्तर पर विकास को चुनाव का आधार न बनाकर गौण महत्व के मुद्दों को विशेष रूप से उठाया जाता है। विडंबना कि बात है कि भारतीय राजनीति में आज भी बहुत जगह यह स्थिति है कि तात्कालिक रूप में कुछ पैसे और उपभोग की वस्तु उपलब्ध कराकर वोट हासिल करने की परंपरा देखी जाती है जो कि लोकतंत्र जहाँ कहने को जनता का शासन होता की बात भारत के संदर्भ में भ्रम पैदा करती है।
ऐसे में यह फिल्म जो चुनावी साक्षरता को ध्यान में रखकर निर्मित की गई है, सरकार के चुनावी साक्षरता के प्रयास के साथ संरेखित दिखती है। नि:संदेह यह फिल्म लोगों को अपने नेताओं के चयन हेतु एक आधार या मानक या नज़रिया प्रदान करती है। साथ ही मतदाताओं को अपने मत के मूल्य को समझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसीलिए इसका सामूहिक प्रसारण किया जाना चाहिए।