प्रेमचंद के प्राय: उपन्यास सामाजिक आदर्श और यथार्थ की भाव भूमि को व्यंजित करते हैं। प्रतिरोधी चेतना और प्रगतिशील विचारों को गतिशील रूप में अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता थी उनमें। 'गोदान' खाँटी यथार्थ की जमीन से जुड़ा उपन्यास है। इसमें भारतीय किसान जीवन के समस्त उतार-चढ़ाव तथा उसकी इच्छा-आकांक्षा और अपेक्षाओं की मुकम्मल तस्वीर उतारी गयी है।