फ़िल्म में कुछ भी नही था न कहानी थी न स्क्रिप्ट अच्छी थी ऐसे लग रहा था मानो डायरेक्टर को इस फ़िल्म को जल्दबाजी में बनाकर पूरा करना था कॉमेडी में राजपाल यादव सजंय मिश्रा अश्वनी कलेसकर की तिकड़ी के पास कॉमेडी के नाम पर कुछ भी नही था मध्यांतर तक फ़िल्म दर्शकों को बांधने में पूरी तरह नाकाम रही थी माधुरी दीक्षित की एंट्री फ़िल्म में कोई खास कमाल नही दिखा पाई विधा बालन को जितना रोल मिला उसमे अपना शत प्रतिशत दिया बाकी फ़िल्म को 2 स्टार